संस्‍कृतशब्‍दकोशः

संस्‍कृत-हिन्दी-आंग्ल शब्दकोश


संस्कृत — हिन्दी

क्लिश् — कष्टानुभवनानुकूलः व्यापारः।; "सः दुःस्थित्या क्लिश्यति।" (verb)

Monier–Williams

क्लिश् — {kliś} cl. 9. P. {kliśnāti} (perf. {cikleśa}##ind. p. {kliśitvā}, or {kliṣṭvā} Pāṇ. 1-2, 7 ; vii, 2, 50), to torment, trouble, molest, cause pain, afflict MBh. R. &c##to suffer, feel pain Bhaṭṭ.: cl. 4. P. {kliśjati}, to torment, cause pain (with acc.) MBh. xii, 6621 Ragh. xiii, 73##Ā. {kliśyate} (rarely P. {ti} Mn. viii, 169 MBh. iii, 10241##p. {kliśyamāna}), to be tormented or molested, be afflicted, feel pain MBh. R. &c##(P.) to be sinful Divyâv. xx: Caus. P. {kleśayati} (rarely Ā. Suśr##aor. Subj. 2. sg. {cikliśas} Bhaṭṭ.), to torment, molest R. v, 27, 33 Suśr. Bhaṭṭ. vi, 17.

इन्हें भी देखें : उत्क्लिश्; उत्क्लिश्य; क्लिश्यमान; परिक्लिश्; प्रक्लिश्; संक्लिश्; सम्प्रक्लिश्; आत्मद्रोहिन्; दु, शुच्, खिद्, पीडय, बाध्, क्लिश्, व्यथय, उपतप्, संतप्, सन्तप्, परितप्, आयस्, उद्विज्, दुःखय; निष्कासय, उत्सारय, निःसारय, निरस्, निर्धू, निर्यापय, निर्वद्, निर्वासय, उच्चाटय, समुत्पाटय, समुदीरय, चालय, समुद्वासय, अवरुध्, उदाकृ, उत्कालय, उद्धू, त्याजय, नाशय, विप्रवासय, विवासय, समाक्षिप्, व्यपरोपय, व्यस्, संचालय, सञ्चालय, निर्विवह्, निर्हन्, निर्हृ, दालय, निस्त्यज्, उदस्, उत्क्लिश्, अपच्यु, अवहन्, अपरुध्, उदज्, उद्वस्, जि, निष्कृ, परिनिर्हन्, परिवृज्, प्रामर्जय, वितथीकृ, विरोपय; व्यथ्, पीड्, क्लिश्, बाध्, दुःखय, संतप्, खिद्; उद्वेजय्, बाध्, कोपय्, क्लिश्, पीडय्, तोदय्, व्यथय्, तापय्, अर्द्, अतिबाध्, अधिबाध्, परिबाध्, प्रबाध्, विबाध्, मिछ्, मृच्, विधृष्, विहेलय्;