संस्‍कृतशब्‍दकोशः

संस्‍कृत-हिन्दी-आंग्ल शब्दकोश


संस्कृत — हिन्दी

तुद् — अन्येषां दुर्वचनैः व्यथनानुकूलः व्यापारः।; "तस्य वचनानि मम मनः अतुदत्।" (verb)

तुद् — कस्य अपि कृत्या वचनेन वा मनसि दुःखोत्पादनात्मकः व्यापारः।; "सत्यवचनं सर्वथा मनः तुदति। / तुदसि मे मर्माणि वाक्शरैः। " (verb)

Monier–Williams

तुद् — {tud} cl. 6. P. {dáti} (p. f. {datī} or {dantī} Pāṇ. 6-1, 173 Kāś##pf. {tutóda}##fut. 2nd {totsyati} or {tottā}, vii, 2, 10 Kār##aor. {atautsīt}) to push, strike, goad, bruise, sting, vex RV. &c##Pass. to pain (said of a wound) Car. vi, 13: Caus., {todita}##[cf. {tóttra} &c##? &c. ; Lat. {tundo}.]

तुद् — {tud} mfn. ifc. 'pricking', {vraṇa-}

इन्हें भी देखें : अनुनितुद्; आतुद्; उत्तुद्; क्रतुद्रुह्; क्रतुद्विष्; धातुद्रावक; नितुद्; निस्तुद्; शुतुद्री, शितद्रुः, सतलजनदी; व्यध्, छिद्, आव्यध्, अनुव्यध्, निर्भिद्, अवभिद्, प्रभिद्, निर्भद्, प्रतिभिद्, विभिद्, विनिर्भिद्, निर्व्यध्, निव्यध्, परिव्यध्, प्रतुद्, निस्तुद्, परिणुद्, तृद्, आतृद्, अतितृद्, अतिव्यध्, निक्ष्, अनुनिक्ष्, उदृष्, उपतृद्, उपार्ष्, नितुद्, नितृद्, परितृद्, प्रच्छिद्, वितुद्, वितृद्, विनिक्ष्, विव्यध्, व्यृष्, श्वभ्र्, संकृत्, संछिद्, सञ्छिद्, सम्भिद्; सूचिः, व्यधनी; ताडय, तुद्, हन्;