संस्‍कृतशब्‍दकोशः

संस्‍कृत-हिन्दी-आंग्ल शब्दकोश


संस्कृत — हिन्दी

मृज् — एकस्मिन् वस्तुनि लग्नस्य अन्यस्य वस्तुनः अनिष्टत्वात् अपनयनानुकूलः व्यापारः।; "सः वस्त्रलग्नां धूलिकाम् अमार्ट्।" (verb)

Monier–Williams

मृज् — {mṛj} (cf. √{marj}, {mārj} and {mṛś}), cl. 2. P. {mārṣṭi} (Ved. also Ā. {mṛṣṭé} and cl. 6. P. Ā. {mṛjáti}, {te}, 3. pl. {mṛñjata}##Pot. {mṛñjyāt}##cl. 1. P. {mārjati}, {te}##pf. {mamārja}, {mamṛjé} &c##3. pl. {mamārjuḥ}##{māmṛjuḥ}##Ā. {māmṛjé}, {jīta}##aor. {amṛkṣat}, {ṣata}##{amārkṣīt} and {amārjīt}##fut. {mraṣṭā}##{mārṣṭā} or {mārjitā} Gr##{mrakṣyate} or {mārkṣyate} &c##{mārjiṣyati} Gr##inf. {marṣṭum}, {mārṣṭum} and {mārjitum} &c##ind. p. {mṛṣvā}##{-mṛjya}##{-mārjya} ), to wipe, rub, cleanse, polish, clean, purify, embellish, adorn (Ā. also 'one's self') &c. &c##to make smooth, curry (e.g. a horse or other animal)##to stroke##to wipe off or out, remove, destroy &c##to wipe off or transfer (impurity, debt &c.) from one's self upon (loc.)##to carry away, win i, 174, 4##({mārṣṭi}), to go ii, 14 (cf. Nir. xiii, 3): Caus. or cl. 10. {marjayati}, {te} (Ved., {mārjayati}, {te} &c##aor. {amamārjat} Gr##{amīmṛjanta}##Pass. {mārjate} ), to wipe, rub, cleanse, purify, adorn &c. &c.##to wipe off, remove, destroy##({marjayate}), to move about, roam vii, 39, 3 (Sīy.): Desid. {mimārjiṣati} and {mimṛkṣati} Gr.: Intens. {marmṛjīti} ({jmá}, {janta}, p. {jāná}), {marmṛjyáte}##{marīmṛjyáte}##{marmārṣṭi} Gr##to rub or wipe off, clean, purify (A. also 'one's self'). [Cf. Gk. ?, ?, ? ; Lat. [829, 3] {mulgere} ; Slav. [ml˘esti] ; Lith. {mílsti} ; Germ., {melke}, {ṃilch} ; Eng. {milk}.]

मृज् — {mṛj} (ifc.), {dharma-mṛy}

इन्हें भी देखें : अनुमृज्; अपमृज्; अभिमृज्; अभिविमृज्; अवमृज्; आमृज्; आमृज्य; उन्मृज्; अवमृज्, अपमृज्, मृज्, विलोपय; प्रक्षालय, परिक्षालय, उपस्पृश्, धाव्, प्रधाव्, निज्, निर्णिज्, प्रणिज्, परिनिर्णिज्, परिमृज्, प्रमृज्, स्नापय, उपस्नापय, अवस्नापय, संस्नापय, संस्पृश्, सम्प्रस्पृश्, निर्मादय, संरी; शिष्य, अवशिष्य, समवशिष्य, परिशिष्य; अपहृ, हृ, परिहृ, अपनी, निवारय, निहन्, अपाकृष्, अपमृज्, अपोह्, धू, अपनुद्, परिमृज्, निराकृ, अपकृ, उत्सारय, वर्जय, अपकर्षय;