संस्कृत — हिन्दी
रक्ष्, संरक्ष्, परिरक्ष् — व्ययापवारणानुकूलः व्यापारः।; "मनोहरः कृपणत्वात् अधिकं धनं रक्षति।" (verb)
इन्हें भी देखें :
रक्ष्, अनुरक्ष्, अभिरक्ष्, प्रतिरक्ष्, विरक्ष्, संरक्ष्, परिरक्ष्;
रक्ष्, अनुरक्ष्, अभिरक्ष्, अनुपालय, प्रतिरक्ष्, विरक्ष्, संरक्ष्, परिरक्ष्, सावधानीभू;